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हमीरपुर से मंडी तक के नेशनल हाईवे NH-03 पर निर्माण कार्य की गंभीर खामियां

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हमीरपुर से मंडी तक के नेशनल हाईवे NH-03 पर निर्माण कार्य की गंभीर खामियों और सुरक्षा जोखिमों को उजागर हुई है। यह स्थिति न केवल स्थानीय जनता के लिए खतरनाक है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण एजेंसियों की तकनीकी अक्षमता को भी दिखाती है। आइए मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं:


🔴 मुख्य समस्याएं और खतरनाक स्थान

  1. कोल्हूसिद्ध – दरकोटी ठाणा सेक्शन:

    • पत्थरों का गिरना और मलबे का जमाव।

    • दरारें और डंगा न होने से सड़क पर खतरा।

    • दरकोटी में एक लेन पूरी तरह बंद, दूसरी पर भी आवागमन मुश्किल।

  2. टौणी देवी – उहल – कक्कड़ रोड जंक्शन:

    • बार-बार मलबा गिरने से सड़क अवरुद्ध।

    • पुराना पंचायत घर और पेड़ NH पर गिरने की आशंका।

    • छोटे वाहनों के लिए अत्यंत खतरनाक।


🏗️ निर्माण एजेंसी की आलोचना

  • गावर एवं सूर्य कंस्ट्रक्शन कंपनी पहले से ही:

    • पाड़छू पुल गिरने,

    • अवैध डंपिंग

    • और गुणवत्ता की कमी को लेकर आलोचना झेल रही है।

  • साढ़े तीन साल में काम पूरा नहीं हुआ, उल्टा जनता को खतरे में डाला जा रहा है।


👨‍💼 अधिकारियों की प्रतिक्रिया

  • इंजीनियर अंकित कुमार का कहना है:

    • “हमीरपुर से सरकाघाट तक हाईवे चालू है।”

    • “खतरनाक स्पॉट्स पर मशीनरी तैनात है।”

    • “टूटे हुए जंक्शन पॉइंट्स पर काम जारी है।”

👉 लेकिन जमीनी स्थिति बयान से मेल नहीं खा रही — यह दर्शाता है कि समस्या को या तो नजरअंदाज किया जा रहा है या उसे हल्के में लिया जा रहा है।


🔎 प्रश्न उठते हैं:

  1. निर्माण एजेंसी की ज़वाबदेही क्यों तय नहीं हो रही?

  2. निरीक्षण एजेंसियां और सरकार सक्रिय कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

  3. क्या बारिश शुरू होने से पहले कोई ठोस तैयारी नहीं की गई?


✅ आगे क्या किया जाना चाहिए?

  • इमरजेंसी डंगे और सुदृढ़ीकरण कार्य तुरंत शुरू किए जाएं।

  • स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण करवा कर जिम्मेदार एजेंसी पर जुर्माना और कार्रवाई की जाए।

  • स्थानीय प्रशासन द्वारा रोज़ाना निगरानी और ट्रैफिक कंट्रोल सुनिश्चित किया जाए।

  • स्थानीय जनता की शिकायतों को प्राथमिकता पर लिया जाए।

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