best news portal development company in india

महिला के यौन उत्पीड़न व जबरन घर में घुसने के मामले में आरोपी को एक वर्ष का कठोर कारावास, जुर्माना भी लगाया

SHARE:

कुल्लू न्यायालय में महिला उत्पीड़न के आरोपी को दोषी करार देते हुए सुनाई गई एक वर्ष की सजा
कुल्लू न्यायालय में महिला उत्पीड़न के आरोपी को दोषी करार देते हुए सुनाई गई एक वर्ष की सजा
कुल्लू न्यायालय में महिला उत्पीड़न के आरोपी को दोषी करार देते हुए सुनाई गई एक वर्ष की सजा

कुल्लू, 10 जुलाई:
जिला कुल्लू के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल की अदालत ने महिला के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन घर में घुसने के एक गंभीर मामले में आरोपी नितिन पुत्र चमन लाल निवासी ढुंगरी, मनाली को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष का कठोर कारावास और विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना लगाया है।

अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला अटॉर्नी उमेंद्र परमार ने बताया कि यह मामला 4 अगस्त 2021 को मनाली के एक गांव में हुई एक गंभीर आपराधिक घटना से जुड़ा है। आरोपी नितिन ने पीड़िता के घर में अवैध रूप से घुसकर उसकी लज्जा भंग करने का प्रयास किया। इस दौरान उसने शारीरिक उत्पीड़न, अशोभनीय इशारों और धमकियों का सहारा लिया, जिससे महिला मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित हुई।

अभियोजन पक्ष ने 5 गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। अदालत ने नितिन को निम्नलिखित सज़ाएं सुनाईं:

  • धारा 452 IPC (जबरन घर में घुसना): 1 वर्ष कठोर कारावास व ₹3,000 जुर्माना

  • धारा 354A IPC (यौन उत्पीड़न): 1 वर्ष कठोर कारावास व ₹3,000 जुर्माना

  • धारा 504 IPC (जानबूझकर अपमान): 1 वर्ष साधारण कारावास

  • धारा 506 IPC (आपराधिक धमकी): 1 वर्ष साधारण कारावास

  • धारा 509 IPC (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना): 1 वर्ष साधारण कारावास

अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस फैसले को महिला सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

In a significant verdict by Kullu’s Judicial Magistrate Rahul, Nitin from Dungri, Manali, has been sentenced to one year of rigorous imprisonment and fines under various IPC sections including 354A (sexual harassment) and 452 (house trespass). The 2021 incident involved illegal entry and harassment of a woman. The court ruled all sentences to run concurrently, marking a strong stance on women’s safety.

Poonam Kumari
Author: Poonam Kumari

Leave a Comment