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मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से टूटा सपना बना सच्चाई, रंजीत को मिला पक्का घर और नया जीवन

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मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत बनता रंजीत का नया पक्का घर, परिवार में लौटी मुस्कान
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत बनता रंजीत का नया पक्का घर, परिवार में लौटी मुस्कान
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत बनता रंजीत का नया पक्का घर, परिवार में लौटी मुस्कान

ऊना, 10 जुलाई:
हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक सुरक्षित, पक्का घर हो, लेकिन जीवन की चुनौतियाँ कई बार यह सपना अधूरा छोड़ देती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ ऊना जिले के नंगल खुर्द निवासी रंजीत सिंह और उसके परिवार के साथ, जिन्होंने माता-पिता के असमय निधन के बाद जीवन की कड़ी चुनौतियों का सामना किया। परंतु हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ने उनका यह सपना साकार कर दिया।

रंजीत को योजना के तहत 5 मरले भूमि और पक्के मकान के लिए 1 लाख रुपये की पहली किश्त प्रदान की गई है। अब दो कमरों, लॉबी और शौचालय युक्त घर की नींव रखी जा चुकी है। योजना के तहत कुल 3 लाख रुपये की सहायता चार किश्तों में दी जाती है, साथ ही जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें तीन बिस्वा तक भूमि भी राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।

रंजीत बताते हैं कि उनके बड़े भाई ने माता-पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उठाई, लेकिन 6 भाई-बहनों के इस परिवार के लिए एक कमरे में रहना और जीवन चलाना बेहद कठिन था। दोनों भाइयों ने दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन चलाया। तब उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से इस योजना की जानकारी मिली।

योजना के तहत न केवल आवासीय सहायता मिली, बल्कि रंजीत की बहन को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण, तीन भाई-बहनों को प्रति माह ₹4000 की सामाजिक सुरक्षा राशि, और कई अन्य सुविधाएं भी दी गईं। यह सरकार द्वारा “अभिभावक” बनने की भावना का प्रमाण है।

अब तक ऊना जिले में 18 बच्चों को योजना के अंतर्गत गृह निर्माण के लिए पहली किश्त दी जा चुकी है, और कुल 294 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा व स्वावलंबन के लिए ₹3.11 करोड़ से अधिक की सहायता दी गई है। उपायुक्त जतिन लाल ने बताया कि प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर पात्र बच्चा इस योजना का लाभ समय पर और प्रभावी ढंग से प्राप्त करे।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच है कि जिन बच्चों के माता-पिता नहीं हैं, उनके लिए सरकार ही माता-पिता है। इसी विचार के तहत योजना में बच्चों को न सिर्फ आवास, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, वस्त्र, भत्ता और यहां तक कि विवाह की व्यवस्था भी की जाती है।

The CM Sukh Aashray Yojana by Himachal Pradesh Government has given hope to orphans like Ranjit Singh of Una, providing him land and funds for a permanent house. The scheme offers ₹3 lakh in four installments along with social, educational, and health support. CM Sukhvinder Singh Sukhu envisions the state as a guardian for orphaned children, making Himachal the first to pass a law recognizing them as “Children of the State”.

Poonam Kumari
Author: Poonam Kumari

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