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अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर शिमला में हुई समीक्षा बैठक, लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश

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शिमला में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त अनुपम कश्यप।
शिमला में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त अनुपम कश्यप।
शिमला में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त अनुपम कश्यप।

शिमला। अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, जहां पीड़ितों को दी जा रही राहत राशिपुनर्वास की स्थिति, और लंबित मामलों की समीक्षा पर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक में बताया गया कि अधिनियम के तहत पीड़ितों को ₹85,000 से ₹8,25,000 तक की राहत राशि प्रदान की जाती है। वर्ष 2018 से अब तक कुल 33 मामले शिमला जिले में लंबित हैं, जबकि साल 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में 9 नए मामले दर्ज हुए हैं। उपायुक्त ने इस पर चिंता जताते हुए न्याय में देरी पर अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की बात कही।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित मामले की स्थिति की मासिक रिपोर्ट जिला कल्याण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया जाना अनिवार्य है, जिससे समय पर न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

जिला पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी ने कहा कि पुलिस विभाग मामलों की तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उपायुक्त ने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि जनजागरूकतासही जांच प्रक्रिया, और प्रभावी पुनर्वास योजनाएं अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के सम्मान और सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी हितधारकों को सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा, ताकि शोषण के मामलों में पीड़ितों को सही न्याय मिल सके।

इस अवसर पर जिला न्यायवादी मुक्ता कश्यपअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवदीप सिंहजिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्माडीएसपी विजय रघुवंशीडीएसपी शक्तिडीएसपी प्रणव चौहान, सहित अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।

A district-level vigilance and sensitization meeting under the SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989, was held in Shimla under Deputy Commissioner Anupam Kashyap’s leadership. The review focused on pending cases, relief funds, and ensuring time-bound, fair investigations. Authorities were instructed to resolve cases swiftly and promote awareness of rights among marginalized communities.

Poonam Kumari
Author: Poonam Kumari

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